Introduction

मित्रों पिछड़े वर्ग के अंदर जो प्रांतीये और क्षेत्रिये भेद-भाव है यही सबसे बड़ा कारण है कि इतना बड़ा वर्ग आज भी अपने अधिकारों से वंचित है। सम्मानपूर्वक जीवन जीने से बंचित है तथा सत्ता और समाज में वो स्थान नहीं पा सका है, जिसका वह हकदार है। पिछड़े वर्ग के अन्दर उत्तर भारत और दक्षिण भारत की परिस्थितयों में बहुत बड़ा अन्तर है। इसका कारण है कि दक्षिण भारतीय मुख्तः तमिल पिछड़े वर्ग के लोगों में शिक्षा का विकास उत्तर भारत से पहले हुआ और उन्होंने आजादी से पहले सन 1915 मंे अपने अधिकारों के लिये आन्दोलन तथा समाज में जागरूकता पैदा की। वहीं उत्तर भारत में ये चेतना 1970 की दशक में जागी। दक्षिण भारत में सन 1915 में पिछड़े वर्ग द्वारा जस्टिश पार्टी का गठन किया गया तथा पिछड़े वर्ग द्वारा आत्म सम्मान आन्दोलन को पूरे दक्षिण भारत में श्री ई.वी. रामास्वामी पेरियार द्वारा संचालित किया गया जो कि ब्राम्हाण विरोधी था क्योंकि तमिलनाडु में ब्राम्हणों की संख्या 4 से 5 प्रतिशत थी परन्तु वह सत्ता में बहुत समय से काबिज थे। आत्म सम्मान आन्दोलन में ब्राम्हणों के साथ-साथ उत्तर भारतीयों तथा उत्तर भारत का भी विरोध किया गया क्योंकि उनका यह मानना था कि उत्तर भारत आर्यों की भूमि है और दक्षिण भारत द्रवणों की भूमि है। इसलिये हमें हिन्दी और संस्कृत का विरोध करना है और द्रवणों के अधिकारों की रक्षा के लिये तमिल भाषा को आगे बढ़ाना है। आत्म सम्मान आन्दोलन के फलस्वरूप दक्षिण भारत का पिछड़ा वर्ग जागृत हो गया, एकजुट हो गया और सत्ता में अपनी भागीदारी पाने के लिये संघर्ष करने लगा। सन 1950 में डी.एम.के. और अन्ना दोरई एक स्वतं़त्र द्रविड़ क्षेत्र की मांग रखी। परन्तु केरल, करनाटक और आन्ध्र प्रदेश द्वारा समर्थन न प्राप्त होने पर यह आन्दोलन बहुत जल्द समाप्त हो गया। इसके बाद सन 1963 में देश के अन्दर राष्ट्रभाषा को लेकर विवाद होता है, जिसके चलते दक्षिण भारत में और पश्चिम बंगाल में हिन्दी के खिलाफ हिंसक आन्दोलन होता है तथा डी.एम.के. एक नारा देती है हिन्दी नेवर-इंग्लिश ऐवर। इसके बाद सन 1966 में तमिलनाडु में चुनाव होते हैं और डी.एम.के. सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आती है तथा काॅमिनिस्टों के समर्थन से दक्षिण भारत में पहली पिछड़े वर्ग की सरकार बनती है। और यहीं से दक्षिण भारत में पिछड़े वर्ग की राजनीतिक विकास की शुरूआत होती है। फलस्वरूप उन्हें सत्ता मिली, शिक्षा मिली यही कारण है कि भारत में दक्षिण भारतीय पिछड़ा वर्ग उत्तर भारतीय पिछड़े वर्ग से कहीं अधिक सामर्थ है सत्ता में काबिज है।

उत्तर भारत के पिछड़े वर्ग को सामाजिक चेतना और राजनीतिक चेतना का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वो हैं डाॅ राम मनोहर लोहिया। डाॅ राम मनोहर लोहिया मार्कसवाद और समाजवाद से प्रेरित थे और उन्होंने समाज से वंचिता को दूर करने तथा सामाजिक, आर्थिक न्याय की स्थापना स्थापित करने के लिये पिछडे़ वर्ग को आगे ले जाने तथा सत्ता में स्थापित करने के लिये संघर्ष किया तथा उत्तर भारत के लिये हिन्दी को एक अनीवार्य भाषा के रूप में स्थापित कराने का प्रयास किया और उन्हांेने अंग्रेजी भाषा का विरोध किया। उनका कहना था कि हिन्दी एक आम आदमी की भाषा है पिछड़े वर्ग की भाषा है और अंग्रेजी उच्च वर्ग तथा संपन्न वर्ग की भाषा है। डाॅ. राममनोहर लोहिया ने समाज में परिवर्तन लाने के लिये सात नियमों को चिन्हित किया जिसे उन्होंने सत्यक्रांति आंदोलन का नाम दिया। उन्होंने चैखम्भा क्रांति और समावेशी विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। इन आंदोलनों के चलते उत्तर भारत का पिछड़ा वर्ग एकजुट हुआ तथा उत्तर भारत में लोहियावादी विचारधारा के साथ कई क्षेत्रिये राजनीतिक दलों का जन्म हुआ। उत्तर भारत में पिछड़े वर्ग की सरकारें बननी शुरू हुयीं। हरियाणा में चैधरी देवीलाल और ओमप्रकाश चैटाला की सरकार। बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार तथा उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार बनती है। और उत्तर भारतीय का पिछड़ा वर्ग सत्ता में भागीदारी पाने का हकदार बन जाता है।

वर्तमान मंे हरियाणा के अन्दर जाट, महाराष्ट्र में मराठा, गुजरात में पाटीदार (पटेल) और राजस्थान में गुर्जर। आरक्षण की लगातार मांग कर रहे हैं, इसका मुख्य कारण आज 21वीं सदी में भी सामाजिक और आर्थिक समानता भारतीय समाज में स्थापित नहीं हो पाई है। अगर हम चाहते हैं कि देश का पिछड़ा वर्ग अपने संख्याबल के अनुरूप आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक तौर पर विकास करे तो हमें एकजुट होना पड़ेगा। जाटों की आरक्षण की मांग का समर्थन मराठाओं को करना होगा। और पाटीदारों के आंदोलन का समर्थन गुर्जरों को करना होगा। पिछड़े वर्ग को अपनी एकता का परिचय देना पड़ेगा। अन्यथा पांच हजार सालों से चली आ रही ब्राम्हणों की बांटों और राज करो की नीति का शिकार पिछड़ा वर्ग फिर होगा। क्योंकि अब वह पिछड़े वर्ग को आर्थिक आधार पर बांट देना चाहिते हैं। पिछड़े वर्ग के अन्दर ऊंच-नीच पैदा कर देना चाहते हैं, इसका देशभर के पिछड़े वर्ग को एक सुर में विरोध करना होगा। सड़कों पर आना होगा। आन्दोलन करना होगा।

धन्यवाद

भुवनेश सिंह कुशवाहा

राष्ट्रीय अध्यक्ष

अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग विकास महासभा


जिला ईकाई

Speech


पिछड़ा वर्ग जो पांच हजार सालों से मनोवादी व्यवस्था द्वारा फैलाये हुये अत्याचारों और शोषण का शिकार रहा है। समय-समय पर समाज के अन्दर महापुरूषों ने जन्म लिया और समाज के उत्थान के लिए संघर्ष किया तथा आने वाली पीड़ियों के सामने ऐसे उदाहरण प्रस्तुत किये कि अगर हम एक हो जायें तो हमारी संख्या और हमारा बाहुबल इतना सक्षम है कि हम इस मनुवादी व्यवस्था को अपने समाज से उखाड़ सकते हैं। तथा एक ऐसे समाज को जन्म दे सकते हैं जहां पर समानता हो, सभी के लिये आदर हो तथा समाज में समाज के विकास के लिये हर वर्ग को आगे आने का और अपना कौशल दिखाने का अवसर प्राप्त हो।

Udesya


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